अनमोल प्यार
अनमोल प्यार
आज राहुल भी नयी साईकल पर स्कूल आया था, कितनी चमक रही थी उसकी साईकल, और उस चमक के साथ उसका चेहरा भी। सभी दोस्त उसे घेर कर खडे थे, और उसकी साईकल की तारीफ कर रहे थे। अजय भी दूर से यह सब देख रहा था, उसका भी मन था की वह राहुल की साईकल देखे और उसकी सवारी करे, लेकिन वह जानता था की राहुल उसे अपनी साईकल दिखायेगा नही बल्की उसे चिढायेगा। इसलिये अजय ने वहां जाने का इरादा त्याग दिया और वहा से चुपाचाप निकलने लगा।
अजय को चुपचाप निकलता देखकर राहुल बोला, “अरे अजय कहा जा रहा है, मेरी नयी साईकल नही देखेगा। तेरी साईकल का तो पता नही कब आयेगी, चल इतने तुझे मै ही घूमा देता हू”,
“नही, कोई जरूरत नही है मुझे घुमाने की, जब मेरी साईकल आ जायेगी मै खुद घूम लूंगा”, अजय ने बनावटी मुस्कान अपने चेहरे पर चिपकाते हुए कहा।
“तेरी साईकल, अरे यार पिछले तीन सालो से तू यही बोल रहा है, लेकिन आज तक तो तेरी साईकल आयी नही है, और पता भी नही कब आयेगी, भाई इस जन्म मे तो आ जायेगी ना” राहुल ने अजय का मजाक बनाते हुए कहा।
“जब आयेगी जब देख लेना की इसी जन्म मे आयेगी या अगले जन्म मे”, अजय ने गुस्सा दिखाते हुए कहा और चल दिया।
अजय के सभी दोस्तो पर साईकिल थी, बस वो ही पैदल स्कूल आता-जाता था. पिछले तीन सालो से अजय को अपनी साईकल का इंतजार था, लेकिन उसका इंतजार आज तक पूरा नही हुआ। उसके पापा हर बार उससे एक्जाम के बाद साईकिल दिलाने को कहते और हर बार किसी ना किसी बहाने से अपनी बात को टाल जाते थे। ‘अरे नही दिलानी तो मना कर दो, कम से कम झूठ तो मन बोलो, सच मै बहुत खराब हो उसके पापा’।
इस बात को लेकर आज सुबह ही उसका अपने पापा से झगडा हो गया था, उसने पापा को फिर से साईकल का वादा याद दिलाया तो वह फिर से अपनी पुरानी परेशानीयो का बहाना बनाकर अपने वादे से मुकरकर कुछ दिन का और इंतजार करन को कहने लगे। लेकिन अजय इस बार बिलकुल भी इंतजार करना नही चाहता था, इसलिये आज वह बुरी तरफ विफर गया था उन पर...
“आपको साईकल दिलानी तो है नही बस ऐसे ही झूठ बोलते रहते हो। बाकी सभी कामो के लिये आप पर पैसे है बस मेरी साईकल के लिये ही नही है। आप मुझसे बिल्कुल भी प्यार नही करते, वरना अब तक मुझे साईकल लाकर दे देते”।
“ऐसा नही है बेटा, मै तुम्हे सच मै प्यार करता हूं, इस बार पूरी कोशिश करूंगा की तुम्हे एक साईकल लाकर दे ही दूं’’ अजय के पापा ने कहा।
“नही रहने दिजिये आप अपना झूठा प्यार जताने के लिये, मत लाईये मेरे लिये कुछ भी.....” अजय ने रोते हुए कहा और अपने स्कूल चला गया ।
अजय साईकल को लेकर पहले ही अपने पापा से नाराज था, और अभी सारे दोस्तो के सामने राहुल ने जो उसका मजाक बनाया उसकी वजह से उसका गुस्सा और ज्याद बढ गया। लंच टाईम मे सब लोग खाना खा रहे थे, लेकिन अजय चुपचाप एक कोने मे बैठा रहा, उसे बिलकुल भी भूख नही थी शायद उसके गुस्से ने उसकी भूख को खत्म कर दिया था।
स्कूल की छुट्टी हुई, सब बच्चे पूरे जोश के साथ घर जा रहे थे, लेकिन अजय का जोश गायब था, वह अपना बैग कंधे पर लटकाये हुए थके हुए कदमो से घर की तरफ चलने लगा। आज उसका घर जाने का बिलकुल भी मन नही था। कुछ दूर आकर वह एक पार्क के बहार बैठ गया। उसके गुस्से ने अब दुख का रूप ले लिया था, इसी दुख मे डूबा अजय सोचता रहा की भगवान ने कैसे माँ-बाप दिये है उसे, जो उसका बिलकुल भी ख्याल नही रखते, उसकी कोई भी ख्वाहिश पूरी नही करते, काश वो भी किसी अमीर घर मै पैदा होता तो उसकी सारी ख्वाहिशे...सारी इच्छाये पूरी कि जाती।
वह अपने इन विचारो मे खोया हुआ काफी देर से वहां बैठा था, तभी उसके मौहल्ले मे सेठ की दुकान पर काम करने वाला राजू वहां से गुजरा। वह शायद दुकान के काम से ही कही गया था, उसके हाथ मै सामान से भरा हुआ एक थैला था। राजू और अजय हमउम्र थे और और अजय अक्सर उसकी दुकान से सामान लेने जाता था इसलिये वह दोनो एक दूसरे को जानते थे और दोनो मे थोडी बहुत बोलचाल भी थी इसलिये अजय को ऐसे बैठा देख कर वह रुक गया।
“अरे अजय क्या हुआ यहां क्यो बैठा है, घर नही जाना है क्या” राजू ने अजय से पूछा
“नही मुझे घर नही जाना है”, अजय ने सिर झुकाये हुए ही राजू को उत्तर दिया
“क्यो क्या हुआ क्यो नही जाना तुझे घर, तेरी मम्मी तेरा इंतजार कर रही होगी”, राजू ने कहा
“कोई बात नही करने दो इंतजार” अजय ने नाराजगी भरे शब्दो से कहा
“अरे इतना गुस्से मै क्यो है भाई, क्या हुआ” अजय का मूड भापते हुए राजू ने कहा
“कोई मेरी फ्रिक नही करता, कोई मुझसे प्यार नही करता, तो क्या करू उस घर मे जाकर। कबसे कह रहा हू की मुझे एक साईकल दिला दो लेकिन कोई भी मुझ साईकल नही दिलाता, मेरे पापा कब से झूठ बोल रहे है मुझसे हर बाल साईकल की जगह कोइ नया बहाना थमा देते है मुझे” अजय ने गीली आंखो से राजू को देखते हुए कहा।
“अच्छा इतनी सी बात के लिये नाराज है तू, अरे पागल दिला देंगे वो तुझे साईकल, एक साईकल के लिये क्यो ऐसा सोचता है तू, कितना प्यार करते है तेरे पापा तुझे” राजू ने अजय को समझाते हुए कहा
“क्या खाक प्यार करते है वो, बिलकुल भी प्यार नही करते वो मुझे, अगर प्यार करते तो तीन सालो से मुझे पागल नही बनाते बल्की मेरे एक बार कहने पर ही साईकल ला देते। ये कैसै प्यार है उसने जो मुझे कुछ भी नही देते वो मुझे”....अजय ने कहा
“ऐसा नही है अजय तुम्हारे पापा जितना कर सकते है तुम्हारे लिये वो उससे ज्यादा ही करते है, और सब कुछ देते है तुम्हे”....राजू ने कहा
“अच्छा ऐसी बात है तो बताओ क्या देते है वो मुझे क्या करते है मेरे लिये” अजय ने राजू की आंखो मे देखते हुए कहा।
अजय की बात सुनकर राजू कुछ देर उसके चेहरे को देखता रहा, फिर उसने अजय का हाथ पकडा और उसे अपने साथ लेकर चल दिया। वह कुछ दूर एक शोरुम के बाहर जाकर रुक गया जहाँ एक बडा सा आईना लगा हुआ था, जिसने वो दोनो साथ दिखायी दे रहे थे।
“सामने देखो मेरे दोस्त, तुम्हारे पापा ने क्या क्या दिया है तुम्हे” राजू ने आईने की तरफ इशारा करते हुए अजय से कहा.
“क्या दिया है, मुझे तो कुछ दिखायी नही दे रहा”, अजय ने राजू को देखते हुए कहा।
“ध्यान से देखो, तुम्हे दिख जायेगा कि क्या दिया है तुम्हारे पापा ने तुम्हे”, राजू ने कहा
राजू के कहने पर अजय फिर से आइने मे झाकने लगा.. उसने गौर से देखा तो उसे आईने मे अजय स्कूल ड्रेस मे कंधे पर बस्ता टांगे दिख रहा था और राजू अपने गंदे से कपडो मे कंधे पर सामान का थैला लिये खडा था।
“ये है तेरे पापा क्या प्यार, जो तुम्हारे कंधे पर स्कूल बैग है, और मेरे पापा नही है इसलिये मेरे हाथ मे सेठ की नौकरी का थैला, और ये है तेरे पापा की मेहनत जो तेरे बदन पर स्कूल ड्रैस के रूप मे दिख रही है.. अब बाताओ तुम्हारे पापा तुम्हे प्यार करते है या नही”, राजू ने अजय की आंखे मे देखते हुए कहा।
राजू की बात सुनकर अजय खामोश हो गया, उसकी आंखो मे आंसू थे, उसने कुछ नही कहा, बस राजू की तरफ देखकर अपना सिर हिलाकर उसकी बातो को मौन सहमती दी।
सुबह पापा से नाराज होकर उनसे लडकर स्कूल जाने वाला अजय भागता हुआ घर पहुचा, उसके पापा घर आ चुके थे, और अजय के घर लौटने से देरे के कारण थोडे से परेशान थे, अजय को देककर उनकी जान मे जान आयी। अजय कुछ पल अपने पापा को देखता रहा और और अगले ही पल भाग कर उनके गले लग गया।
“क्या हुआ बेटा, क्यो रो रहा है” अजय के पापा ने पूछा
“पापा मुझसे गलती हो गयी, मै आज के बाद कभी आपका दिल नही दुखाऊंगा, ना ही आपसे साईकल मांगूगा मुझे साईकिल की जरूरत नही है, आप मेरे पापा हो ये ही बहुत है मेरे लिये” अजय ने रोते हुए कहा।
“अच्छा सच मै तुझे साईकिल की जरूरत नही है, फिर मै जो साईकल लाया हू उसका क्या करू”, अजय के पापा ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।
“आप मेरे लिये साईकल लाये है”, अजय ने अपने पापा की तरफ देखते हुए पूछा
“हां लाया तो हू, लेकिन वो वाली नही ला सका जो तू चहाता था, थोडी सी सस्ती वाली है, इस बार तु इससे काम चला ले अगली बार मै और अच्छी वाली साईकल ला दूंगा”, अजय के पाप ने कहा
“आप जो लाये है वो ही बहुत है मेरे लिये”, अजय अपने पिता के गले लगता हुआ बोला
“क्या करू बेटा पुरानी अंगूठी बेचकर तेरे लिये बस ये ही साईकल ला पाया” अजय के पिता ने मन मे सोचते हुए अपने हाथ की खाली अंगूली देखी जिसमे वह अपने पिता की दी हुई अंगूठी पहनते थे ।
“पापा आपका दिया हर तोफ्हा अनमोल है मेरे लिये, क्योकी आप इस दुनिया मै सबसे ज्यादा प्यार करते हो मुझे और आपका ये अनमोल प्यार ही मेरे लिये सबसे बडा तोफ्हा है”.. अपनी नम आंखे से बहते आंसुओ के साथ अजय के दिल की आवाज उसे सुनायी दी।
-------------------------------------------
(दोस्तो आपको मेरी कहानी अनमोल प्यार कैसी लगी, कृपया अपने अमूल्य विचारो से मुझे अवश्य अवगत कराये, मुझे आपके कमेंटस का इंतजार रहेगा।)
अरुण गौड़
मो.-821898987
madhura
02-Feb-2025 10:04 AM
v nice
Reply
Pallavi
15-Dec-2021 10:32 PM
Nice
Reply
Barsha🖤👑
14-Dec-2021 09:09 PM
Nice
Reply